
गरीबी से निकालने का एकमात्र उपाय, बच्चों की शिक्षा और रोजगार को मतदान
बिहार से मजदूरों का दूसरे राज्यों में नहीं होगा पलायन
संवाददाता/रणजीत कुमार। जहानाबाद। जिले के गांधी मैदान में आयोजित जनसभा में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। प्रशांत किशोर ने मंच संभालते ही जनता से अपने वही तीन सवाल पूछे, जिनका जिक्र वे हर सभा में करते हैं। उन्होंने लोगों से जात-पात की राजनीति से बचने की अपील की और कहा कि नेताओं के झूठे वादों और सब्जबाग दिखाने वाली राजनीति से बिहार को सिर्फ नुकसान हुआ है। अगर उनकी सरकार बनी तो बिहार से बेरोजगारी खत्म करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अब बिहार से मजदूरों को गुजरात और दूसरे राज्यों में पलायन नहीं करना पड़ेगा, बल्कि फैक्टरी बिहार में ही लगेंगी। उन्होंने जनता से अपील की एक बार वोट बच्चों की शिक्षा और रोजगार को ध्यान में रखकर दिजीए। गरीबी से निकालने का यही मंत्र है। पार्टी के सबसे प्रमुख नेता व संभावित प्रत्याशी डा.अभिराम सिंह के द्वारा गांधी मैदान में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने अशोक चौधरी के खिलाफ दो सौ करोड़ के जमीन खरीद को लेकर लगाए गए आरोपों पर एक बार फिर दृढ़ता से कहा – जो कहा है, उसकी जांच करा लें। अगर उनके आरोप बेबुनियाद हैं तो फिर मानहानि का मुकदमा करें और जेल में डाल दें। जदयू के नेता नीरज कुमार ने भी कहा है कि पब्लिक में सामने आकर मंत्री को जवाब देना चाहिए। पीके ने कहा कि चुनाव के पहले भाजपा-जदयू व कांग्रेस-राजद का फिक्स मैच है। दोनों ओर से एक दूसरे को गाली देंगे ताकि लोग इसी में उलझे रहें लेकिन बिहार युवाओं व असली मुद्दों पर कुछ नहीं बोलेंगे। राबड़ी देवी भाजपा के अध्यक्ष को राबड़ी देवी भाई कह रहे हैं और तेजस्वी के मंच से पीएम मोदी की मां को गाली दी जा रही है। इससे स्पष्ट है कि एक रणनीति के तहत दोनों एक दूसरे को गाली देकर पब्लिक का असली मुद्दों से ध्यान भटकाना चाह रहे हैं। प्रशांत किशोर ने राजद प्रमुख लालू यादव पर हमेशा की तरह अनोखे अंदाज में हमला बोला। बोले- लालू यादव से लोगों को अपने बाल-बच्चों के हित के लिए सीखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बिहार के लोग जिनके बच्चे मैट्रिक, बीए, एमए कर चुके हैं, फिर भी उन्हें नौकरी नहीं मिल रही है, लेकिन लालू जी ने अपनी नौवीं फेल बेटे को बिहार का राजा बनाने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। इधर बिहार के पचास लाख से अधिक युवा मैट्रिक-इंटर कर गुजरात-महाराष्ट्र व देश के अन्य राज्यों की फैक्ट्रियों में मजदूरी करने पर विवश है।